संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा उस वक्त गरमा गई, जब विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने चीन की कथित घुसपैठ का मुद्दा उठाया। उनके भाषण के बीच सदन में तीखी नोकझोंक और हंगामा देखने को मिला। राहुल गांधी ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर सीधा हमला बोला। इस दौरान उन्होंने एक मैगजीन में छपी रिपोर्ट के अंश पढ़े, जिस पर सत्ता पक्ष ने आपत्ति दर्ज कराई।
Rahul Gandhi के बयान से संसद में चीन मुद्दे पर तीखी बहस और हंगामा
धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान Rahul Gandhi ने कहा कि सीमा से जुड़े मामलों में पारदर्शिता जरूरी है और देश को सच्चाई जानने का अधिकार है। उन्होंने चीन से संबंधित सुरक्षा चुनौतियों का जिक्र करते हुए सरकार से जवाब मांगा। जैसे ही उन्होंने एक प्रकाशित मैगजीन का हवाला देना शुरू किया, सत्ता पक्ष की ओर से आपत्ति उठी।
रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि लोकसभा में अप्रकाशित किताब या ऐसे दस्तावेजों को उद्धृत नहीं किया जा सकता, जो आधिकारिक रूप से सदन के पटल पर न रखे गए हों। उन्होंने Rahul Gandhi से मांग की कि जिस सामग्री का जिक्र किया जा रहा है, उसे सदन में प्रस्तुत किया जाए। सरकार का तर्क था कि संसद की बहस तय नियमों और प्रक्रियाओं के तहत ही हो सकती है, खासकर जब विषय राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हो।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सदन में शोरगुल बढ़ता गया और कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित भी हुई। यह मुद्दा जल्द ही राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया, क्योंकि विपक्ष इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहा था।
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विपक्ष का समर्थन और नियमों पर सरकार का रुख
इस विवाद के बीच समाजवादी पार्टी के सांसद Akhilesh Yadav ने Rahul Gandhi का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि चीन से जुड़ा मामला बेहद संवेदनशील है और इस पर खुली चर्चा होनी चाहिए। अखिलेश यादव का कहना था कि जब राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल हो, तो विपक्ष के नेता को अपनी बात रखने से रोका नहीं जाना चाहिए।
वहीं, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि स्पीकर पहले ही सदन को नियमों की जानकारी दे चुके हैं और मैगजीन या अखबारों में प्रकाशित लेखों को सीधे कोट करने की अनुमति नहीं है। सरकार ने दोहराया कि बहस लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संसदीय नियमों के भीतर रहकर ही हो सकती है।
Rahul Gandhi ने अपनी सफाई में कहा कि उनके द्वारा उद्धृत स्रोत भरोसेमंद हैं और उनमें एक पूर्व सेना प्रमुख के अप्रकाशित संस्मरणों के अंश भी शामिल हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार को डर नहीं है, तो इन बातों को पढ़ने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही। इस बयान के बाद सदन में एक बार फिर हंगामा तेज हो गया।
फिलहाल, यह बहस केवल एक दिन की नहीं बल्कि भविष्य में भी संसद और राजनीतिक विमर्श में गूंजने वाली है। चीन, सीमा सुरक्षा और पारदर्शिता जैसे मुद्दे आने वाले दिनों में बजट सत्र की बहस का अहम हिस्सा बने रहेंगे।
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