प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में बढ़ते खर्च के बीच छात्रों के लिए राहत की खबर है। ‘Sathee Project, JEE-NEET’ जैसी पहल ने लाखों परिवारों का आर्थिक बोझ कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा मंत्रालय और IIT Kanpur के सहयोग से शुरू किए गए इस प्लेटफॉर्म से अब तक 20 लाख से ज्यादा छात्र जुड़ चुके हैं।इस पहल का उद्देश्य साफ है। बच्चों को कोचिंग पर लाखों रुपये खर्च न करने पड़ें और उन्हें गुणवत्ता वाली पढ़ाई मुफ्त में मिले। प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन पूरी तरह फ्री है। छात्र सिर्फ गूगल लॉग-इन से वेबसाइट या ऐप पर पढ़ाई शुरू कर सकते हैं।
कैसे काम करता है यह Sathee Project मॉडल?
इस पहल की जिम्मेदारी IIT Kanpur ने संभाली है। प्रोफेसरों और देश के शीर्ष संस्थानों के छात्रों के अनुभव को एक जगह लाया गया है। रिकॉर्डेड लेक्चर, प्रश्नों के समाधान और एग्जाम स्ट्रेटेजी को व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराया गया है।प्लेटफॉर्म की खास बात यह है कि यहां 8 प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जा रही है। इनमें इंजीनियरिंग, मेडिकल, लॉ और अन्य सरकारी परीक्षाएं शामिल हैं। प्रश्न बैंक राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसियों के पैटर्न के अनुरूप तैयार किए गए हैं।
ऑनलाइन परीक्षा इंटरफेस भी वास्तविक परीक्षा जैसा है। इससे छात्रों को असली एग्जाम का अनुभव मिलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए समान अवसर उपलब्ध कराना शिक्षा के लोकतंत्रीकरण की दिशा में बड़ा कदम है।
AI फीचर्स और बहुभाषी कंटेंट से बढ़ी पहुंच
प्लेटफॉर्म में अब एआई आधारित फीचर्स भी जोड़े गए हैं। वीडियो लेक्चर और स्टडी मटेरियल 12 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हैं। इससे अलग-अलग राज्यों के छात्रों को अपनी भाषा में तैयारी करने का मौका मिलता है। लाइव डाउट सॉल्विंग, लाइव लेक्चर और 800 से अधिक प्रैक्टिस सेट छात्रों को नियमित अभ्यास का अवसर देते हैं। Sathee project
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ऐप के इस्तेमाल पर छात्रों को रिवॉर्ड कॉइन भी मिलते हैं, जिन्हें वे शैक्षणिक गिफ्ट में बदल सकते हैं।यह मॉडल उन छात्रों के लिए खास है जो महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते। डिजिटल माध्यम से गांव और छोटे शहरों के विद्यार्थी भी बड़े शहरों जैसी तैयारी कर पा रहे हैं।
शिक्षा प्रणाली में बदलाव की दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षा की गंभीर तैयारी 11वीं और 12वीं से शुरू होनी चाहिए। शुरुआती कक्षाओं में संतुलित पढ़ाई और खेल जरूरी है। यह प्लेटफॉर्म भी उसी सोच को आगे बढ़ाता है। सरकार और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से तैयार यह मॉडल भविष्य में और परीक्षाओं को शामिल कर सकता है।
यदि यह पहल लगातार अपडेट और गुणवत्ता बनाए रखती है, तो यह कोचिंग उद्योग का मजबूत विकल्प बन सकती है।कुल मिलाकर, यह पहल शिक्षा को सुलभ और किफायती बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले वर्षों में इसका प्रभाव और व्यापक हो सकता है।
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