CBSE: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब शिक्षा व्यवस्था पर भी देखने को मिल रहा है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाएं रद्द करने का फैसला लिया है। यह परीक्षाएं 16 मार्च से 10 अप्रैल 2026 के बीच आयोजित होने वाली थीं। बोर्ड के इस निर्णय के बाद हजारों भारतीय छात्रों और उनके अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अब छात्रों का रिजल्ट किस आधार पर तैयार किया जाएगा और क्या इससे उनके शैक्षणिक वर्ष पर असर पड़ेगा।
CBSE: किन देशों में रद्द की गई 12वीं बोर्ड परीक्षाएं
CBSE द्वारा जारी आधिकारिक सर्कुलर के अनुसार मध्य-पूर्व के सात देशों में निर्धारित परीक्षाएं अब आयोजित नहीं होंगी। यह फैसला मौजूदा सुरक्षा हालात और क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए लिया गया है।इन देशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों पर इस फैसले का सीधा असर पड़ा है। खाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल हैं जो सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध हैं और हर साल हजारों छात्र यहां से बोर्ड परीक्षा में शामिल होते हैं।
जिन देशों में परीक्षाएं रद्द की गई हैं, उनमें शामिल हैं:
- बहरीन
- ईरान
- कुवैत
- ओमान
- कतर
- सऊदी अरब
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
बोर्ड के अनुसार स्थानीय स्कूल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से प्राप्त रिपोर्ट के बाद यह फैसला लिया गया। सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए परीक्षा आयोजित करना सुरक्षित नहीं माना गया।बोर्ड का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोपरि है। इसलिए परीक्षा को स्थगित करने के बजाय रद्द करने का निर्णय लिया गया।शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम असाधारण जरूर है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए इसे व्यावहारिक माना जा रहा है।
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अब रिजल्ट कैसे तैयार होगा, क्या है संभावित तरीका
परीक्षाएं रद्द होने के बाद छात्रों और अभिभावकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि परिणाम किस आधार पर घोषित किया जाएगा। फिलहाल बोर्ड ने अंतिम मूल्यांकन पद्धति की घोषणा नहीं की है। हालांकि शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पहले अपनाए गए मॉडल की तरह वैकल्पिक मूल्यांकन प्रणाली लागू की जा सकती है।
संभावना है कि छात्रों के परिणाम तैयार करने के लिए निम्नलिखित आधार अपनाए जाएं:
- Internal Assessment के अंक
- Pre-Board Exam का प्रदर्शन
- Practical Marks और प्रोजेक्ट वर्क
- स्कूलों द्वारा भेजा गया Academic Record
कोविड-19 महामारी के दौरान भी इसी तरह का मॉडल अपनाया गया था, जिसमें छात्रों के पिछले प्रदर्शन के आधार पर परिणाम घोषित किए गए थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पारदर्शी और संतुलित मूल्यांकन प्रक्रिया अपनाई जाती है, तो छात्रों का शैक्षणिक वर्ष सुरक्षित रह सकता है।इसके अलावा बोर्ड जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर सकता है ताकि स्कूलों और छात्रों को स्पष्ट जानकारी मिल सके कि मूल्यांकन किस तरह होगा।
खाड़ी देशों में बोर्ड परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय अचानक जरूर है, लेकिन इसे छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। अब सभी की नजर बोर्ड के अगले कदम पर है, जिसमें परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया स्पष्ट की जाएगी। यदि संतुलित मूल्यांकन प्रणाली अपनाई जाती है तो छात्रों के भविष्य पर इसका नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
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