भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी Maruti Suzuki ने ग्रीन लॉजिस्टिक्स की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने रेल के जरिए गाड़ियों की ढुलाई का अनुपात तेजी से बढ़ाया है, जिससे न सिर्फ लागत में कमी आई है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी ठोस योगदान मिला है। वर्ष 2016 में जहां कंपनी की केवल 5.1 प्रतिशत गाड़ियां रेल से भेजी जाती थीं, वहीं 2025 तक यह आंकड़ा बढ़कर 26 प्रतिशत हो चुका है। यह बदलाव ऑटोमोबाइल सेक्टर में टिकाऊ लॉजिस्टिक्स मॉडल की ओर बढ़ते रुझान को दर्शाता है।
रेल आधारित लॉजिस्टिक्स से बदला Maruti Suzuki का ट्रांसपोर्ट मॉडल
बीते नौ वर्षों में रेल के माध्यम से वाहनों की ढुलाई में जबरदस्त इजाफा देखने को मिला है। 2016 में जहां सिर्फ 77 हजार गाड़ियां रेल से भेजी गई थीं, वहीं 2025 तक यह संख्या 7.5 गुना से ज्यादा बढ़ चुकी है। इसका सीधा असर कंपनी की सप्लाई चेन की दक्षता पर पड़ा है। रेल परिवहन के जरिए एक साथ बड़ी संख्या में वाहन सुरक्षित और समयबद्ध तरीके से अलग-अलग राज्यों तक पहुंचाए जा रहे हैं।
कंपनी के मुताबिक, गुजरात और मानेसर स्थित इन-प्लांट रेलवे साइडिंग से 2025 में कुल रेल डिस्पैच का करीब 53 प्रतिशत हिस्सा संचालित किया गया। इससे सड़क परिवहन पर निर्भरता घटी और ट्रैफिक दबाव भी कम हुआ। यह मॉडल भविष्य में अन्य ऑटो कंपनियों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है, खासकर तब जब ईंधन लागत और कार्बन उत्सर्जन वैश्विक चिंता का विषय बने हुए हैं।
पर्यावरण संरक्षण में ठोस योगदान और भविष्य की रणनीति
रेल आधारित ढुलाई का सबसे बड़ा फायदा पर्यावरण को मिला है। आंकड़ों के अनुसार, इस बदलाव से करीब 87,904 मीट्रिक टन CO₂ उत्सर्जन में कमी आई है, जबकि लगभग 68.7 मिलियन लीटर ईंधन की बचत हुई है। यह उपलब्धि भारत के नेट-जीरो 2070 लक्ष्य की दिशा में एक अहम योगदान मानी जा रही है।
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कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ हिसाशी ताकेउची ने बताया कि 2025 में कंपनी ने दो बड़े मील के पत्थर हासिल किए। पहला, मानेसर प्लांट में भारत का सबसे बड़ा इन-प्लांट रेलवे साइडिंग शुरू किया गया। दूसरा, चेनाब नदी पर बने विश्व के सबसे ऊंचे रेलवे आर्च ब्रिज के जरिए कश्मीर घाटी तक वाहनों की ढुलाई की गई, जो किसी भी ऑटोमेकर के लिए पहली बार हुआ।
आगे की योजना पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि 2030-31 तक रेल आधारित वाहन डिस्पैच को 35 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही ‘Circular Mobility’ मॉडल के तहत डिजाइन से लेकर वाहन के जीवन के अंत तक कार्बन फुटप्रिंट घटाने पर फोकस किया जा रहा है।
Maruti Suzuki का यह ग्रीन लॉजिस्टिक्स सफर बताता है कि बड़े औद्योगिक पैमाने पर भी सतत विकास और व्यावसायिक सफलता साथ-साथ चल सकती है।
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